कोर्इ भी समुदाय उसी समय विकास कर सकता है जब वह पूरी तरह से शिक्षा के अपने अधिकार प्राप्त कर ले क्योंकि शिक्षा के द्वारा ही मनुष्य का सर्वांगीण (पूरी तरह से) विकास सम्भव हो पाता है शिक्षा न केवल व्यक्ति की क्षमताओ और योग्यताओं को विकसित करती है बल्कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति में सामाजिक एकता, देश प्रेम एवं अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह करने की “शक्ति उत्पन्न होती है। परन्तु दुख की बात यह है कि भारतीय मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में बहुत पिछड़े हुए हैं हमे ‘इस्लामी आंतकवाद’ जैसे घटिया “शब्द से सम्बोधित किया जाता है, मुसलमानों को पिछडे़ हुए वर्ग के रूप में देखा जाता है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ने भी यह सिद्ध कर दिया है कि मुसलमानो की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। भारत में हम अपने राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक अधिकार शिक्षा के ही माध्यम से प्राप्त कर सकते है हमारे देश में मुसलमानों का प्रत्येक क्षेत्र में पिछड़ा होने का सबसे बड़ा कारण अशिक्षा ही है वैसे तो इस्लाम, ज्ञान और शिक्षा का ही धर्म है परन्तु शायद भारतीय मुसलमान पिछली कुछ सदियों में इस बात को भूल गये थे और उसका परिणाम आज की नयी पीढ़ी को भुगतना पड़ रहा है। खुश की बात यह है कि पिछले कुछ समय से भारतीय मुसलमानों में जागरूकता का विकास हुआ है और उन्हें लगने लगा है कि शिक्षा के बिना वे दुनिया से कदम मिलाकर नहीं चल सकेंगे यही कारण है कि भारतीय मुसलमानों में अब शिक्षा के प्रति लगाव बढ़ा है वह शिक्षा के लिये गम्भीर हुए है तथा यह भावना जागृत हुर्इ है कि यदि हम ज्ञात प्राप्त न कर सके तो कोर्इ बात नहीं परन्तु अपने बच्चों को हम ज्ञान से दूर नहीं रखेंगे। अगर यह दृश्टिकोण कुछ समय तक बना रहा और भारतीय मुलसमानों ने इस्लाम के उद्देश्यों को याद रखा तो इसमें कोर्इ शंका नहीं है कि वह दिन दूर नहीं होगा जब भारतीय मुसलमान अपने ज्ञान के आधार पर प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे एवं एक न्यायप्रिय, भ्रष्टाचार मुक्त एवं भार्इचारे से युक्त भारत का निर्माण करने में विशेष योगदान दे सकेंगे। इसके विपरीत यदि भारतीय मुसलमानों ने इस जागरूकता को बनाये न रखा एवं इस्लाम के उद्देश्यों को भुला दिया तो वे इस्लाम का नाम आंतकवाद, गरीबी तथा अशिक्षा के साथ जुड़ने से कभी नहीं रोक सकेगे। अब आवशयकता इस बात की है कि भारतीय मुसलमान अपने खोए हुए अस्तित्व को शिक्षा के माध्यम से वापस पाने का प्रयत्न निरन्त करते रहें तभी वे अपने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों को पा सकेंगे एवं इस्लाम के सही अर्थ को विश्व के सामने प्रस्तुत कर सकेगे एवं विकास के पथ पर सबसे आगे-आगे चलते दिखार्इ पड़ेगे।.......166